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लोग डांटने से ज्यादा कोमल शब्दों का जवाब देते हैं।

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प्रोवेर्ब्स वर्ल्ड.इन (Proverbs World.in)

मूल अर्थ: 

उपर्युक्त कहावत का वास्तविक अर्थ यह है कि आपकी वाणी सुनने वाले व्यक्ति के कानों से होकर हृदय में वास करती है। सुन रहे व्यक्ति का व्यवहार आपके कहे गए शब्दों पर ही निर्भर करता है।

In English:
 The original Proverb:
People respond better to gentle words than to scolding.--Hawaiian Proverb

विचार-विवरण


नमस्कार !

आप सभी का हिंदी कहावतों की दुनिया में हार्दिक स्वागत है। हम हर रोज नई-नई कहावतों को आप तक पहुंचाकर अपनी इस आनंदमय यात्रा को कुशलता से जारी रखने का प्रयास कर रहे हैं।
आज इस अनुच्छेद में हम हवाई कहावत " लोग डांटने से ज्यादा कोमल शब्दों का जवाब देते हैं।" का विस्तार से अर्थ समझने का प्रयास करेंगे।

इस कहावत का वास्तविक उद्देश्य यह समझना है कि क्रोध में कहें गए शब्द  बोलने व सुनने वाले के मन और मस्तिष्क पर नकारात्मक प्रभाव डालते है। हर समय क्रोधित होकर डांटने वाले व्यक्ति को जवाब कोई भी अन्य व्यक्ति देना पसंद नहीं करता।
इसका दुष्परिणाम यह भी है कि लोग आपसे बात करना बंद कर देते हैं और दूरी बनाना शुरू कर देते हैं। जिसकी वजह से आपके शब्दों का मूल्य अन्य व्यक्तियों की नजरों में कम हो जाता है। अंत में, हम सीखेंगे कि वाक्य में कहावत का उपयोग कैसे करें।

आइए  हम इसे एक उदाहरण से समझने का प्रयास करते है।

रामानंद और सुरेश दोनों मित्र थे।वे दोनों अलग-अलग फेक्ट्रियों में काम करते थे। उन दोनों के मालिक का स्वभाव एक दूसरे के बिल्कुल विपरीत था । काम में हानी होने के परिणाम से जहां  रामानंद के मालिक ने अपने कर्मचारियों को डांट फटकार लगाकर और क्रोध में मालिक के कटू वचनों से कर्मचारियों ने चुप्पी साध कर बर्बादी का शोक मनाया वहीं दूसरी ओर सुरेश के मालिक ने बड़े कोमल शब्दों से कर्मचारियों की परेशानियां सुनकर और एक दूसरे के प्रश्नों का जवाब देकर हानी से उभरने का तोड़ निकाल लिया। यह बात रामानंद के मालिक को पता चली, वह असमंजस में बैठा सोच ही रहा था कि सुरेश का मालिक उससे मिलने चला आया और सारी बातें जानने के बाद उसने रामानंद के मालिक से कहा कि लोग डांटने से ज्यादा कोमल शब्दों का जवाब देते हैं। अगर आप उन्हें डांटने के बजाए नर्म व कोमल शब्दों में उनसे हानी होने की वजह जानने का प्रयास करतें तो आप भी परेशानी का तोड़ निकाल लेते। यह बात रामानंद के मालिक को अच्छे से समझ आ गई थी और वह अब कोमल शब्दों का ही प्रयोग करता था जिसकी वजह से फैक्ट्री के माहोल में भी सकारात्मक परिवर्तन आ गया।

अर्थात्  इस उदहारण से हमें यह ज्ञात हुआ कि लोग डांटने से ज्यादा कोमल शब्दों का जवाब देते हैं।


अर्थात् मन के सारे बैर व अहंकार को मिटाकर  मीठी वाणी बोलने से सुनने वाले के साथ - साथ आप का मन व  अंतरात्मा दोनों ही शीतल व निर्मल हो जाते हैं। और सुनने वाले के साथ साथ आपके जीवन में भी सकारात्मकता का वास हो जाता है क्योंकि आपकी वाणी मनुष्य के कानों से होकर सीधा हृदय को स्पर्श करती है जिसकी वजह से उसका जवाब  व व्यवहार आपके कहे गए वचनों पर ही निर्भर करता है।

प्रेम से कहें गए वचन ठीक मिश्री की भाती ही दूसरे के कानों में रस घोल देते हैं जिसकी वजह से सामने वाले व्यक्ति के मन में आप के लिए प्रसन्नता के भाव उत्पन्न होने प्ररांभ हो जाते हैं।

यह  कहावत लोग डांटने से ज्यादा कोमल शब्दों का जवाब देते है। इन्हीं मूल तथ्यों पर आधारित है।




वाक्य में नीतिवचन का उपयोग।

1)   टीचर ने आज सोनू को काफ़ी गुस्से से डांटा था इसीलिए वो ख़ामोश था और किसी से बात नहीं कर रहा था  तभी कहते है लोग डांटने से ज्यादा कोमल शब्दों का जवाब देते है। 

2)   लोग डांटने से ज्यादा कोमल शब्दों का जवाब देते है  क्योंकि पापा की डांट की वजह से बेटा अभी भी नाराज़ है।


3)   ऑटो वाले ने कोमल शब्दों का प्रयोग कर मुसाफिरो को राज़ी कर लिया इससे हमे यही सिख मिलती है कि लोग डांटने से ज्यादा कोमल शब्दों का जवाब देते है। 


धन्यवाद!

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--Swati Tyagi

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